पुराणों के अनुसार इस तरह यज्ञ देता है धन, संपत्ति, बल एवं ऐश्वर्य और अचंभित है इसके वैज्ञानिक तथ्य | Yagya Benefits Hindi

0
1177

क्या है यज्ञ एवं इसकी विशेषता | Yagya Benefits 

importance-yagya-hindiमत्स्य पुराण के अनुसार जिस कर्म विशेष में पाँच उपादानों का संयोग हो वह “यज्ञ” कहलाता है | पाँच उपादानों से तात्पर्य है देवता, वेद-मंत्र, हवन में प्रयुक्त होने वाली सामग्री, ऋत्विक और दक्षिणा आदि | कुछ महाज्ञानियों के द्वारा परमार्थ प्रयोजन के लिए किया गया सत्कर्म ही यज्ञ है |

“यज्ञ” शब्द “यज्” धातु से बना है | इसके तिन अर्थ देवपूजन, संगतिकरण एवं दान बताए गए है | देवपूजन का तात्पर्य यह है कि देवी-देवता के सद्गुणों को ग्रहण कर परिष्क्र्त व्यक्तित्व का निर्माण करना है | संगतिकरण का अर्थ यह है कि एक समान विचारधारा के लोगों का सद-उद्देश्यपूर्ण मिलन है और दान का अर्थ दयालुता, धर्मपरायणता और वैश्विक एकीकरण से है | इस प्रकार इन तीन प्रकार की सद्वृत्तियाँ का मिला-जुला रूप ही ‘यज्ञ’ है |

पुराणों द्वारा यज्ञ की महिमा 

importance-benefits-yagya

कालिका पुराण के अनुसार यज्ञ करने से देवता संतुष्ट होते है एवं यज्ञ ही सारे चराचर श्रृष्टि के प्रथिष्ठापक है | यज्ञ ही प्रथ्वी को धारण किये हुए है एवं यह  सभी मनुष्यों को पाप मुक्त कराता है | जैसा कि हम सब जानते है कि प्रथ्वी में रहने वाला हर व्यक्ति अन्न खाकर ही जीवित रहता है | अन्न वर्षा (बादलों) द्वारा ही उत्पन्न होता है और बादलों की उत्पत्ति यज्ञ से होती है इस प्रकार यह सम्पूर्ण जगत यज्ञमय है |

importance-yagya-hindi

महानारायण उपनिषद में भी यज्ञ की महिमा बताई गयी है | जिसे एक श्लोक के माध्यम से समझाया गया है |

यज्ञेन हि देवा दिवंगता: यज्ञे नासुरान्पानुदंतः |

यज्ञेन द्विषन्तो मित्रा भवन्ति यज्ञेन सर्व प्रतिष्ठ्तम् तस्माज्ञं परम वदन्ति ||

इसका अर्थ यह है कि यज्ञ से देवताओं ने स्वर्ग को प्राप्त किया एवं असुरों को पराजित भी किया | यज्ञ से शत्रु भी मित्रवत् बन जाते है | यज्ञ में सभी प्रकार के गुण समाहित है इसलिए श्रेष्ठ व्यक्ति यज्ञ को श्रेष्ठ कर्म मानते है |

भगवान श्री कृष्ण और ब्रम्हा जी ने क्या कहा यज्ञ के विषय में जानने के लिए नीचे नेक्स्ट बटन पर क्लिक करें |

Facebook Comments